दुर्गा चालीसा | सम्पूर्ण लिरिक्स हिंदी में | Durga Chalisa Lyrics in Hindi

दुर्गा चालीसा माँ दुर्गा को समर्पित 40 चौपाइयों की एक सम्पूर्ण स्तुति है जिसे कवि देवीदास ने लिखी थी। इसमें माँ के समस्त रूपों का वर्णन है और शंकराचार्य जी का एक अत्यंत दुर्लभ प्रसंग भी है जो इसे अन्य चालीसाओं से विशेष बनाता है। नवरात्रि में, शुक्रवार को और किसी भी संकट के समय इसका पाठ करने से माँ की कृपा शीघ्र मिलती है।
नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी ॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥
शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥
रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे ॥ ४
तुम संसार शक्ति लै कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना ॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ॥ ८
रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
परगट भई फाड़कर खम्बा ॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं ॥ १२
क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
दयासिन्धु दीजै मन आसा ॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी ॥
मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता ॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥ १६
केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी ॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै।
जाको देख काल डर भाजै ॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
तिहुँलोक में डंका बाजत ॥ २०
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे।
रक्तबीज शंखन संहारे ॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥
रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब।
भई सहाय मातु तुम तब तब ॥ २४
अमरपुरी अरु बासव लोका।
तब महिमा सब रहें अशोका ॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नरनारी ॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें ॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्ममरण ताकौ छुटि जाई ॥ २८
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ॥
शंकर आचारज तप कीनो।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥
शक्ति रूप का मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछितायो ॥ ३२
शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी ॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥
आशा तृष्णा निपट सतावें।
मोह मदादिक सब बिनशावें ॥ ३६
शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥
करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धिसिद्धि दै करहु निहाला ॥
जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ॥
श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
सब सुख भोग परमपद पावै ॥ ४०
देवीदास शरण निज जानी।
कहु कृपा जगदम्ब भवानी ॥
शरणागत रक्षा करे, भक्त रहे नि:शंक।
मैं आया तेरी शरण में, मातु लिजिये अंक ॥
दुर्गा चालीसा: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दुर्गा चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
दुर्गा चालीसा प्रातःकाल सूर्योदय के समय या संध्याकाल में पढ़ना सर्वोत्तम है। नवरात्रि में प्रतिदिन, शुक्रवार को और किसी संकट के समय इसका पाठ विशेष फलदायी है।
दुर्गा चालीसा के पाठ से क्या लाभ होता है?
दुर्गा चालीसा का नियमित पाठ करने से शत्रुओं से रक्षा होती है, दुःख और दारिद्र्य दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है। इसके अंतिम दोहे में भक्त माँ की शरण की प्रार्थना करता है।
दुर्गा चालीसा किसने लिखी?
दुर्गा चालीसा के अंत में देवीदास नाम आता है जो इसके रचयिता माने जाते हैं। वे माँ दुर्गा के परम भक्त थे और इस चालीसा में उन्होंने माँ के नौ रूपों, उनकी शक्ति और उनकी करुणा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया है।
चालीसा का क्या अर्थ है?
चालीसा शब्द का अर्थ है चालीस। दुर्गा चालीसा में ठीक 40 चौपाइयाँ हैं जो माँ दुर्गा की स्तुति, उनके विभिन्न रूपों और उनकी लीलाओं का वर्णन करती हैं। हनुमान चालीसा की तरह यह भी 40 छंदों की एक पूर्ण स्तुति है।
इस चालीसा में शंकराचार्य का प्रसंग क्यों है?
दुर्गा चालीसा में एक विशेष प्रसंग है जिसमें बताया गया है कि आदि शंकराचार्य ने कठोर तप किया और काम-क्रोध पर विजय पाई, पर जब उन्होंने माँ की शक्ति का स्मरण नहीं किया तो उनकी शक्ति चली गई। तब उन्होंने माँ की शरण ली और माँ ने तुरंत शक्ति प्रदान की।
दुर्गा चालीसा में कितने रूपों का वर्णन है?
इस चालीसा में माँ दुर्गा के अनेक रूपों का वर्णन है — अन्नपूर्णा, गौरी, कालिका, सरस्वती, लक्ष्मी, नरसिंही, मातंगी, धूमावती, भुवनेश्वरी, बगलामुखी, तारा और भैरवी। इसीलिए इसे दशमहाविद्या और नवदुर्गा दोनों की स्तुति माना जाता है।
क्या दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती एक है?
नहीं। दुर्गा सप्तशती मार्कण्डेय पुराण का एक भाग है जिसमें 700 श्लोक हैं। दुर्गा चालीसा एक छोटी और सरल स्तुति है जिसमें 40 चौपाइयाँ हैं। दोनों का उद्देश्य माँ दुर्गा की आराधना है, पर दुर्गा चालीसा घर पर नित्य पाठ के लिए अधिक सुलभ है।
दुर्गा चालीसा पाठ से पहले क्या करना चाहिए?
स्वच्छ स्नान करके लाल या पीले आसन पर बैठें। माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। पाठ से पहले ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का 11 बार जाप करें और फिर श्रद्धापूर्वक चालीसा का पाठ करें।
नवरात्रि में दुर्गा चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
नवरात्रि में प्रतिदिन एक बार पाठ करना पर्याप्त है। विशेष मनोकामना होने पर तीन, पाँच या ग्यारह बार पाठ किया जा सकता है। अष्टमी और नवमी के दिन दुर्गा चालीसा का पाठ अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।
क्या पुरुष दुर्गा चालीसा पढ़ सकते हैं?
हाँ। दुर्गा चालीसा स्त्री-पुरुष, बालक-वृद्ध सभी पढ़ सकते हैं। माँ दुर्गा की भक्ति में कोई भेद नहीं है। चालीसा के अंतिम छंद में स्वयं कवि कहते हैं कि जो कोई इसे गाएगा, वह सब सुखों को भोगकर परमपद पाएगा।
दुर्गा चालीसा में ‘हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो’ का क्या अर्थ है?
इस पंक्ति में माँ दुर्गा के नरसिंह रूप की महिमा है। प्रह्लाद की रक्षा करते हुए माँ ने हिरण्याक्ष (हिरण्यकशिपु) का वध किया और उसे उसके कर्मों का फल दिया। स्वर्ग पठायो का तात्पर्य मृत्यु से है, यह काव्य की परंपरागत अभिव्यक्ति है।


